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neelkanth (aghor sadhak )
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TANTRA

सर्वग्रह पीड़ा निवारण तंत्र

यह प्रयोग सामान्य ग्रह-शांति के उपायों से अलग एक पारंपरिक तांत्रिक ग्रह-शांति एवं उतारा प्रयोग माना जाता है। इसमें विभिन्न वनस्पतियों की जड़ें, पत्ते, पंचगव्य, अन्न, तिल तथा अन्य पदार्थों का संयुक्त प्रयोग किया जाता है।

इस प्रयोग की एक महत्वपूर्ण भावना यह है कि साधना के साथ प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का भाव भी बना रहे।

वनस्पतियों की जड़ें

आक, धतूरा, अपामार्ग, बरगद और पीपल की जड़ें लगभग 3-3 इंच के समान आकार के छोटे टुकड़ों में ली जाएँ।

जड़ लेने से पहले उस वृक्ष को प्रणाम करके मन में वृक्ष-देवता से क्षमा और अनुमति की भावना रखें। जड़ निकालते समय वृक्ष को अनावश्यक क्षति न पहुँचाएँ और आवश्यकता से अधिक जड़ कभी न लें।

विशेष संकल्प: जिस वनस्पति/वृक्ष से जड़ ली गई हो, उसी की एक छोटी पौध शनिवार के दिन किसी उपयुक्त स्थान पर रोपित या दान करने का संकल्प रखा जाए।

पत्ते

शमी, आम और गूलर के एक-एक पत्ते ही लिए जाएँ। आवश्यकता से अधिक पत्ते न तोड़े जाएँ।

पर्यावरण एवं जीव-जंतुओं के प्रति नियम

इस प्रयोग के साथ सदैव यह संकल्प रखा जाए कि—

“मेरे किसी भी धार्मिक या तांत्रिक प्रयोग के कारण प्रकृति, वृक्ष, वनस्पति, पशु-पक्षी अथवा किसी अन्य जीव को किसी भी प्रकार की अनावश्यक हानि नहीं पहुँचेगी।”

वनस्पति से सामग्री लेते समय पेड़ को नुकसान न पहुँचाया जाए। जहाँ संभव हो, गिरी हुई सामग्री का उपयोग किया जाए और जड़ लेने की स्थिति में बहुत छोटी एवं आवश्यक मात्रा ही ली जाए।

पशु-पक्षियों के घोंसले, उनके निवास स्थान या प्राकृतिक वातावरण को नुकसान न पहुँचाया जाए।

इस प्रकार साधना के साथ प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, संरक्षण और पुनःरोपण का भाव भी जुड़ता है।

प्रकृति से लिया गया है तो प्रकृति को लौटाना भी साधना का एक हिस्सा माना जाए।

अन्य सामग्री

  • गाय का दूध

  • छाछ

  • गाय का घी

  • गोमूत्र

  • चावल

  • चना

  • मूंग

  • गेहूँ

  • काला तिल

  • सफेद तिल

  • पीली सरसों

  • सफेद चंदन

  • शहद

  • फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा

  • एक मिट्टी का मटका

  • एक छोटा कलश या पात्र

प्रयोग की विधि

शनिवार के दिन साधक स्नान आदि करके शुद्ध होकर अपने सामने एक छोटा कलश रखकर बैठे।

ऊपर दी गई प्रत्येक सामग्री को एक-एक करके अपने ऊपर से ( 7) उतारते हुए उस पात्र में डालें। जड़ों और अन्य सामग्री को भी इसी क्रम में पात्र में रखा जाए।

सभी सामग्री डालने के बाद फिटकरी का छोटा टुकड़ा उसमें डालें और पात्र को ढक्कन से बंद कर दें।

संध्या के समय इस उतारे हुए पात्र को लेकर पीपल के वृक्ष के पास जाएँ। उसकी जड़ के समीप लगभग एक हाथ गहरा गड्ढा करके पात्र को उसमें दबा दें और मिट्टी से ढक दें।

इसके बाद वहाँ से बिना पीछे मुड़े सीधे शिव मंदिर जाएँ। परंपरा में इस दौरान किसी से बातचीत न करने का भी विधान माना जाता है।

शिव मंदिर पहुँचकर भगवान शिव के समक्ष बैठकर निम्न मंत्र का जाप करें।

मंत्र

ॐ नमो भास्कराय मम सर्वग्रह पीड़ा नाशय कुरु कुरु स्वाहा॥

Om Namo Bhaskaraya Mama Sarva Graha Peeda Nashaya Kuru Kuru Swaha.

प्रयोग की विशेषता

इस प्रयोग में पंचगव्य, अन्न, तिल, वनस्पतियाँ और विशेष वृक्षों की जड़ों का संयुक्त प्रयोग होने के कारण इसे साधारण उतारा नहीं माना जाता। परंपरागत तांत्रिक दृष्टि से इसका उद्देश्य व्यक्ति से संबंधित ग्रहजनित बाधाओं के लिए एक संयुक्त शांति-संकल्प करना है।

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