
1.विद्या यक्षिणी
मंत्र:
ह्रीं वेदमातृभ्यः स्वाहा ।
लाभ: विद्या, बुद्धि और स्मरण शक्ति की वृद्धि।
2.जनरंजिनी यक्षिणी
मंत्र:
ॐ क्लीं जनरंजिनी स्वाहा ।
लाभ: सबको प्रिय बनाने और आकर्षण शक्ति।
16.कुबेर यक्षिणी
मंत्र:
ॐ कुबेर यक्षिण्यै धनधान्यस्वामिन्यै धन-धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा ।
लाभ: धन, धान्य और समृद्धि की प्राप्ति।
17.चंद्रिका यक्षिणी
मंत्र:
ॐ ह्रीं चंद्रिके हंसः क्लीं स्वाहा ।
लाभ: चंद्रमा के समान शीतलता, सौंदर्य और शांति।
3.घंटाकर्णी यक्षिणी
मंत्र:
ॐ पुरं क्षोभय भगवति गंभीर स्वरे क्लैं स्वाहा ।
लाभ: शत्रुओं का नाश और विजय।
4.कालकर्णी यक्षिणी
मंत्र:
ॐ क्लौं कालकर्णिके ठः ठः स्वाहा ।
लाभ: तांत्रिक बाधाओं का निवारण।
5.मदना यक्षिणी
मंत्र:
ॐ मदने मदने देवि ममालिंगय संगं देहि देहि श्रीः स्वाहा ।
लाभ: आकर्षण और वशीकरण।
6. महामाया यक्षिणी
मंत्र:
ॐ ह्रीं महामाये हुं फट् स्वाहा ।
लाभ: माया और मोहिनी शक्ति की प्राप्ति।
7. माहेन्द्री यक्षिणी
मंत्र:
ॐ ऐं क्लीं ऐन्द्रि माहेन्द्रि कुलुकुलु चुलुचुलु हंसः स्वाहा ।
लाभ: इन्द्रजाल और तेज की सिद्धि।
8. कपालिनी यक्षिणी
मंत्र:
ॐ ऐं कपालिनी ह्रां ह्रीं क्लीं क्लैं क्लौं हससकल ह्रीं फट् स्वाहा ।
लाभ: तांत्रिक सिद्धि और शत्रु पर नियंत्रण।
8. पदमिनी यक्षिणी
मंत्र:
ॐ ह्रीं आगच्छ पदमिनि वल्लभे स्वाहा ।
लाभ: वैवाहिक सुख और प्रेम।
10. मानिनी यक्षिणी
मंत्र:
ॐ ऐं मानिनि ह्रीं एहि एहि सुंदरि हस हसमिह संगमिह स्वाहा ।
लाभ: आकर्षण और वशीकरण की शक्ति।
11. मदनमेखला यक्षिणी
मंत्र:
ॐ क्रों मदनमेखले नमः स्वाहा ।
लाभ: वशीकरण और प्रियता।
12. विलासिनी यक्षिणी
मंत्र:
ॐ विरुपाक्षविलासिनी आगच्छागच्छ ह्रीं प्रिया मे भव क्लैं स्वाहा ।
लाभ: प्रेम और सौंदर्य।
13. अनुरागिणी यक्षिणी
मंत्र:
ॐ ह्रीं आगच्छानुरागिणी मैथुनप्रिये स्वाहा ।
लाभ: प्रेम और अनुराग की वृद्धि।
14. विभ्रमा यक्षिणी
मंत्र:
ॐ ह्रीं विभ्रमरुपे विभ्रमं कुरु कुरु एहि एहि भगवति स्वाहा ।
लाभ: भ्रमन और आकर्षण।
18.शंखिनी यक्षिणी
मंत्र:
ॐ शंखधारिणी शंखाभरणे ह्रां ह्रीं क्लीं क्लीं श्रीं स्वाहा ।
लाभ: सौभाग्य और लक्ष्मी की प्राप्ति।